बहुपद किसे कहते हैं परिभाषा, सूत्र एवं महत्वपूर्ण तथ्य – Bahupad

नमस्कार दोस्तों Top Kro में आपका स्वागत है। आज की इस पोस्ट में हम बहुपद के बारे में जानेंगे। गणित में बहुपद (Bahupad) सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय होता है। शिक्षक मानते है कि बहुपद के बिना गणित के प्रश्नों को हल करना बहुत मुश्किल है क्योंकि यह गणित का आधार है जिसके बिना गणित में विशेषज्ञ होना मुश्किल है।

इस पोस्ट में हम जानेंगे कि Bahupad किसे कहते हैं, बहुपद कितने प्रकार के होते हैं तथा बहुपद के कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। आपसे अनुरोध है कि इस पोस्ट को पूरा पढ़ें ताकि सभी बातें आपको अच्छे से समझ आ सके।

बहुपद क्या है – Polynomial Kise Kahate Hain

चर, अचर के गुणांक तथा ऋणेतर घातांक के जोड़, घटाव या गुणन की क्रिया वाले बीजगणितीय व्यंजक को बहुपद (Bahupad) कहा जाता है। अर्थात धनात्मक (+) और ऋणात्मक (-) चिह्नों से बने कई पदों के व्यंजक को बहुपद कहते हैं। अर्थात a + a1x + a2x² + a3x³ +…………………… + anxⁿ के रूप में रहने वाले व्यंजक को बहुपद कहते है। जहाँ a, a1, a2, a3 ……an अचर वास्तविक संख्या होती है और n पूर्ण संख्या होती है।

जैसे :- 2x⁵ + 3xy³ + 6x² ओर 2y³+ 4y² + yz तथा 7x⁶y + 3x²yx² – 5yx बहुपद के उदाहरण है।

बीजीय बहुपद – Algebraic Polynomial In Hindi

चर एवं अचर बहुपदों को मिला लेने से जो पद प्राप्त होते है उन्हें बीजीय बहुपद कहा जाता है।

जैसे:- x – 7, x + 24, y + 1 आदि।

बीजीय बहुपद के प्रकार

बीजीय Bahupad मुख्यतः दो प्रकार के होते है एक अचर बहुपद व दूसरा चर बहुपद।

1. अचर बहुपद

अचर बहुपद का अर्थ है ऐसा पद जिसका मान बदलता नहीं है अर्थात ऐसा पद जिसका मान हमेशा स्थिर रहता है उसे अचर बहुपद कहते है। अचर बहुपद वास्तविक या काल्पनिक संख्या, दोनों हो सकते है तथा अचर बहुपद का घात शून्य होता है।

जैसे:- 1, 2, 3, 4, 5…इत्यादि अचर बहुपद है क्योंकि इनका मान सदैव स्थिर रहता है। इनको हम बदल नहीं सकते हैं।

2. चर बहुपद – Char Bahupad

चर बहुपद का अर्थ है ऐसा पद जिसका मान बदलता रहता है अर्थात ऐसा पद जिसका मान जरूरत के अनुसार बदलता रहता है उसे चर बहुपद कहते है। चर बहुपद को x, y, z द्वारा सूचित किया जाता है। चर बहुपद कभी भी काल्पनिक नही होता।

जैसे:- x = 2y + 4

यहां y का मान जरूरत अनुसार बदल सकता है इसलिए यह चर बहुपद का उदाहरण है।

बहुपद की पहचान

यदि किसी व्यंजक के सभी पदों की घात एक धनात्मक पूर्णाक होता है तो उसे हम बहुपद कहते है।

दूसरे शब्दों में, यदि किसी व्यंजक का घात भिन्न, ऋणात्मक पूर्णाक या अपरिमेय संख्या होता है, तो वह बहुपद नही कहलाता।  जैसे:- 3x² + x + 2 एक बहुपद है क्योकि यहां x का घात धनात्मक हैं। लेकिन √x +√3 बहुपद नहीं है क्योकि x का घात परिमेय संख्या नही हैं।

बहुपदों की घात

बहुपदों में चर की बड़ी घात बहुपद की घात कहलाती है। जैसे:-

2x² + x + 3 में चर की अधिकतम घात 2 हैं।

4x³ + 2x + 5 में चर की अधिकतम घात 3 हैं।

7x⁴ + 5x + 7 में चर की अधिकतम घात 4 हैं।

घात के आधार बहुपद के प्रकार

घात के आधार पर Bahupad के चार प्रकार होते हैं शून्य बहुपद, रैखिक बहुपद, द्विघात बहुपद व त्रिघात बहुपद। आइये अब एक – एक करके इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

1). शून्य बहुपद – Zero Polynomials

p(x) = 0 को शून्य बहुपद कहते है क्योंकि इसका घात बताया नही जा सकता है।

2). रैखिक बहुपद – Linear Polynomials

ऐसी बहुपद जिसकी घात एक हो उसे हम रैखिक बहुपद के नाम से जानते हैं। जैसे x + 5 = 8 यहां x की घात 1 है इसलिए यह रैखिक बहुपद है तथा ax + 4, जहाँ a ≠ 0 आदि। यह रैखिक बहुपद का उदाहरण है।

3). द्विघात बहुपद – Quadratic Polynomials

जिस बहुपद में चर की घात 2 हो उन्हें हम द्विघात बहुपद कहते हैं जैसे x² + 4 = 7 यहां x की घात 2 है इसलिए यह द्विघात बहुपद है। जैसे x² + y = 6 यहां x की घात भी 2 है इसलिए यह भी रैखिक बहुपद है तथा x² + y² = 12 यह भी द्विघात बहुपद है क्योंकि यहां x तथा y की घात 2 है।

4). त्रिघात बहुपद – Cubic Polynomials

जिस बहुपद में चर की घात 3 हो उन्हें हम त्रिघात बहुपद कहते हैं जैसे x³ + 3 = 8 यहां x की घात 3 है इसलिए यह त्रिघात बहुपद है। तथा x³ + y² – z = 9 यह भी त्रिघात बहुपद है क्योंकि यहां x की घात 3 है।

चर की संख्या के आधार पर बहुपद के प्रकार

चर की संख्या के आधार पर भी Bahupad तीन प्रकार के होते हैं एक चर वाले बहुपद, दो चर वाले बहुपद तथा तीन चर वाले बहुपद। आइये अब इनके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।

1). एक चर वाले बहुपद

ऐसे बहुपद जिनमें सिर्फ एक चर हो वह एक चर वाले बहुपद कहलाते हैं। जैसे x + 3 = 9 यह एक चर वाला बहुपद है क्योंकि इसमें एक चर a है।

2). दो चर वाले बहुपद

ऐसे बहुपद जिनमें दो चर हों उन्हें हम दो चर वाले बहुपद कहते हैं। जैसे x + y = 5 यह दो चर वाला बहुपद है।

3). तीन चर वाले बहुपद

ऐसे बहुपद जिनमें तीन चर हों वह तीन चर वाले बहुपद कहलाते हैं जैसे- x + 2y + 3z = 16 यह तीन चर वाला बहुपद है।

बहुपद का शून्यक – Zeroes of Polynomials

किसी बहुपद के चर के वे सभी मान, जो बहुपद को शून्य के बराबर कर दे, वह बहुपद का शून्यक कहलाता है।

जैसे:- ax + b का शून्ययक –b/a होगा।

बहुपद के शून्यक एवं गुणांक में सम्बन्ध | Bahupad ka sambandh

  1. रैखिक बहुपद का शुन्यक

p(x) = ax + b जहाँ a ≠ 0 हो, तो p(x) का शून्यक 1 होता है। रैखिक बहुपद का शुन्यक –b/a = –(अचर पद) / (x का गुणांक) होता है।

  1. द्विघात बहुपद का शुन्यक

p(x) =  ax² + bx + c, जहाँ a ≠ 0 है। द्विघात बहुपद के दो होते है उन्हें ग्रीक अक्षर α (अल्फा) और β (बीटा) से व्यक्त किया जाता है।

शून्यक (α, β) = – b ± √(b – 4ac) / 2a

शून्यको का योगफल (α + β) = –b/a = अचर / (x का गुणांक)

शून्यको का गुणनफल = c/a अर्थात अचर / (x का गुणांक) होता है।

ax² + bx + c = (α – x) (β – x)

  1. त्रिघात बहुपद के शुन्यक

P(x) = ax³ + bx² + cx + d जहां a ≠ 0 है। त्रिघात बहुपद के तीन शुन्यक होते हैं जिन्हें क्रमशः α (अल्फा) β (बीटा) और γ (गामा) से व्यक्त किया जाता हैं।

α + β + γ = -b/a = x² का गुणांक/x³ का गुणांक

αβ + βγ + γα = c/a = x का गुणांक/x³ का गुणांक

αβγ = अचर पद/x³ का गुणांक

शेषफल प्रमेय – Remainder Theorem In Hindi

यदि p(x) एक बहुपद (Bahupad) हो, जिसका घात (n > 1) हो तथा इसको (x – a) से भाग दिया जाता है, तो शेषफल p(a) होता है। जैसे:- x – a = 0 इसलिए x = a

Note:- 
किसी बहुपद p(x) में ( x + a) से भाग देने पर शेषफल P (-a) होता है।

किसी बहुपद p(x) में ( ax + b) से भाग देने पर शेषफल P (-b /a) होता है।

यदि P(x) एक या एक से अधिक घात वाला कोई बहुपद है और a कोई वास्तविक संख्या है तब यदि P(x) को रैखिक बहुपद (x – a) से विभाजित किया जाए तो शेषफल P(a) होता है।

गुणनखंड प्रमेय – Factor Theorem In Hindi

यदि p(x) कोई बहुपद हो, जिसकी घात (n > 1) हो तथा इसको (x – 1) से भाग देने पर शेषफल P(a) = 0 हो तो (x – a), p(a) का एक गुणनखंड होता है। यदि हमे किसी बहुपद का गुणनखंड पता हैं तो हम शून्यक ज्ञात कर सकते हैं।

उदाहरण :- जाँच करें कि क्या x – 3 बहुपद x³ – 3x² + 2x – 6 का एक गुणनखंड है।

हल:- यहां P(x) = x³ – 3x² + 2x – 6

हम जानते हैं कि यदि (x – 3), P(x) का एक गुणनखंड है तो शेषफल 0 होगा।

x – 3 का शून्यक x – 3 = 0 होगा तब x = 3 होगा
इसलिए P(x) में x = 3 रखने पर,

P(3) = (3)³ – 3(3)² + 2(3) – 6
P(3) = 27 – 3(9) + 6 – 6
P(3) = 27 – 27 + 6 – 6
P(3) = 0

अब शेषफल 0 प्राप्त हुआ इसलिए (x – 3), बहुपद p(x) का गुणनखंड है।

परिमेय व्यंजक किसे कहते हैं?

यदि P(x) और q(x) दो Bahupad हो और q(x) ≠ 0, तो P(x) / q(x) को परिमेय व्यंजक कहा जाता है। 

महत्वपूर्ण तथ्य – Important Facts About Bahupad

 1.  बहुपद को घात के बढ़ते या घटते क्रम में लिखना बहुपद का मानक रूप कहलाता है।

  1. बहुपद के चर की सबसे बड़ी घात बहुपद की घात कहलाती है।
  2. दो बहुपदों का योगफल, अंतर और गुणनफल हमेशा एक बहुपद होता है लेकिन दो बहुपदों का भाग हमेशा बहुपद नही होता।
  3. द्विघात बहुपद में शुन्यकों की संख्या दो होती है जिन्हें α (अल्फा) और β (बीटा) कहा जाता है।
  4. त्रिघात बहुपद में शुन्यकों की संख्या तीन होती है जिन्हें α (अल्फा) β (बीटा) और γ (गामा) कहते है।
  5. प्रत्येक बहुपद एक परिमेय व्यंजक होता है, लेकिन प्रत्येक परिमेय व्यंजक एक बहुपद नही होता।
  6. P(x) और q(x) बहुपद हो और q(x) ≠ 0, तो P(x) / q(x) एक परिमेय व्यंजक होता है तथा यह बहुपद तभी होगा, जब q(x), P(x) का एक गुणनखंड होगा।
  7. P(x) / q(x), q(x) ≠ 0 का गुणात्मक व्युत्क्रम q(x) / P(x) होता है जब P(x) ≠ 0।
  8. किसी भी बहुपद का शून्य के साथ गुणा शून्य ही होता है।
  9. P(x) / q(x) लघुतम रूप में तभी कहलाएगा, जब P(x) तथा q(x) का महत्तम समपवर्त्तक ( Hcf ) 1 हो।

उम्मीद करता हूं दोस्तों की बहुपद से सम्बंधित हमारी यह पोस्ट आपको काफी पसंद आई होगी तथा अब आप जान गए होंगे कि बहुपद किसे कहते हैं तथा Bahupad कितने प्रकार के होते हैं?

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