दहेज प्रथा पर निबंध – Dahej Pratha Essay In Hindi

नमस्कार दोस्तों Top Kro में आपका स्वागत है। इस पोस्ट में हम “दहेज प्रथा के बारे में ( dahej pratha essay in hindi ) पढेंगे। Essay on Dahej pratha in hindi की सहायता से विद्यार्थी दहेज के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर पाएंगे है ओर दहेज प्रथा को खत्म करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। 

इस निबंध के माध्यम से हमने बताया है कि दहेज प्रथा क्या है, Dahej pratha की शुरुआत कब हुई, दहेज प्रथा एक अभिशाप कैसे है, दहेज प्रथा के क्या नुकसान है तथा दहेज प्रथा को कैसे खत्म किया जा सकता है? इत्यादि के बारे में जानकारी देने का प्रयास किया है। इस पोस्ट को हमने आसान भाषा मे लिखने का प्रयास किया है ताकि आपको सभी बातें आसानी से समझ आ सकें।

इस पोस्ट में आपको दहेज प्रथा पर कई निबन्ध दिए गए है जैसे दहेज प्रथा एस्से इन हिंदी 100 शब्दों में, दहेज प्रथा पर निबंध 300 शब्दों में, दहेज प्रथा एस्से 500 शब्दों में तथा दहेज प्रथा पर 10 लाइन इत्यादि।

दहेज प्रथा पर निबंध 100 शब्दों में – Dahej pratha essay in hindi

दहेज प्रथा एक ऐसी बुरी प्रथा है जिसे सामाजिक कुरीतियां मैं शामिल किया जा सकता है। यह प्रथा सदियों से चली आ रही है। दहेज प्रथा का मतलब है कि लड़की की शादी के समय लड़की के परिवार वालों को दहेज के रूप में बहुत कुछ समान लड़के के परिवार वालों को देना पड़ता है।

लेकिन गरीब परिवार के लोग यह करने में असमर्थ होते हैं और उसके पश्चात लड़के पक्ष के लोगों द्वारा Dahej pratha के नाम पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है या दहेज के लिए विवश किया जाता है। वर्तमान में इस प्रथा को रोकने के लिए सरकार द्वारा काफी प्रयास किये जा रहे है लेकिन अभी भी यह प्रथा पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है।

दहेज प्रथा पर निबंध 300 शब्दों में – Dahej pratha par nibandh

एक ऐसी प्रथा है जिसमें दुल्हन के परिवार वालों को दूल्हे के परिवार वालों को कुछ सामान ये पैसे देने होते हैं। आज काफी हद तक समाज द्वारा दहेज की निंदा की जाती है लेकिन कुछ लोगों का तर्क यह भी है कि इसका अपना महत्व है। यह प्रथा समाज मे एक बहुत बड़ी बुराई है।

कुछ लोग स्वतंत्र रूप से रहना पसंद करते हैं और उनको दहेज के रूप में मिली नकदी, फर्नीचर, कार और अन्य ऐसी संपत्तियां शामिल हैं जो उनके लिए वित्तीय सहायता के रूप में काम करती हैं। लेकिन किसी इंसान या परिवार को विवश करके उनसे पैसे या सामान लेना कैसे अच्छा हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति गरीब है तो वो कैसे पैसे और कीमती सामान दे सकता है। दहेज प्रथा के कारण कुछ लोग बेटियों को पाप समझने लग गए।

कई लोग यह भी तर्क देते हैं कि जो लड़कियां दिखने में सुंदर नहीं होती वे दूल्हे की वित्तीय मांगों को पूरा करके उस से शादी कर लेती हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लड़कियों को बोझ के रूप में देखा जाता है।

कुछ माँ-बाप यह सोचकर बेटियों को गर्भ में ही मरवा देते है कि बेटी की शादी कैसे होगी या बेटी की शादी के समय दहेज कैसे देंगे? इसलिए अगर बेटी का जन्म ही नहीं होगा तो उनको दहेज भी नहीं देना पड़ेगा। यह देखकर कई बार ऐसा लगता है कि आज इंसानियत पूरी तरह से मर चुकी है।

अगर कोई पुरुष केवल दहेज के लिए किसी लड़की से शादी करे तो ऐसी जगह वह लड़की कभी खुश नहीं रह सकती। क्योकि जब तक उस लड़की को दिया हुआ धन उनके पास है तब तक वह बेटी खुश है। लेकिन दहेज खत्म होने के बाद ये लोग अपना असली रूप दिखाते है और बेटियों को परेशान करना शुरू कर देते है।

दहेज प्रथा ने कई हसते-खेलते परिवारों को उजाड़ा है। दहेज हमारी भारतीय संस्कृति पर एक बड़ा कलंक है। हालांकि अब ऐसा समय है जब ऐसी सोच को बदलना चाहिए और दहेज प्रथा जैसे सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करना चाहिए। अगर हम सब मिलकर प्रयास करें तो इस बुराई को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

दहेज प्रथा पर निबंध 500 शब्दों में

प्रस्तावना

प्राचीन काल से ही दहेज प्रथा हमारे देश के साथ-साथ विश्व के कई अन्य देशों में भी प्रचलित है। शुरुआत में शायद यह प्रथा बेटियों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए शुरू की गई थी क्योंकि बेटियां विवाह के बाद नए स्थान पर, नए तरीके से अपना जीवन शुरू करती है। लेकिन समय बीतने के साथ यह महिलाओं की मदद करने के बजाए एक कुप्रथा में बदल गई।

दहेज प्रथा क्या है?

शादी के समय दुल्हन को दी जाने वाली वित्तीय सहायता या कोई सामान दहेज प्रथा है। शुरुआत में शायद यह प्रथा बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके नए जीवन मे आने वाली समस्याओं को हल करने के लिए चलाई गई थी। आज लोग लड़की वालों से मांग कर दहेज ले रहे है जो कि बहुत गलत है। आज यह Dahej pratha लोगों की जिंदगी ले रही है।

क्या दहेज प्रथा समाज के लिए अभिशाप है?

दहेज लेना और देना दोनों ही पाप है। दहेज ने महिलाओं के खिलाफ कई अपराधों को जन्म दिया है। हर लड़की के माता-पिता उसके जन्म के बाद से ही लड़की की शादी के लिए बचत करना शुरू कर देते हैं। वे कई साल शादी के लिए बचत करते हैं क्योंकि शादी के समय सजावट से लेकर खानपान तक की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर होती है।

दुल्हन के माता-पिता अपनी बेटी की शादी पर इतना खर्च करते हैं कि वे अक्सर अपनी आयु को कम कर लेते हैं क्योंकि अगर किसी से कर्ज ले लिया तो उसको चुकाने की सिरदर्दी, अगर बैंक से लोन ले लिया तो उसको समय पर चुकाना ओर ऐसी ही कुछ समस्याओं से घिरे रहते हैं।

सास – ससुर अक्सर उनकी बहू द्वारा लाए गए दहेज की तुलना अपने मोहल्ले या रिश्तेदारी में अन्य दुल्हनों द्वारा लाए गए उपहारों से करते रहते हैं और उन्हें छोटा दिखाने की कोशिश करते रहते है । लड़कियां अक्सर इस वजह से भावनात्मक रूप से तनाव महसूस करती हैं और किसी मानसिक बीमारी से भी पीड़ित हो जाती हैं।

कुछ लोगों ने अपनी बहू के साथ बदसलूकी करने की आदत बना रखी है और कभी भी उसे अपमानित करने का मौका नहीं छोड़ते। कई मामले ऐसे होते है जहां लड़की वालों द्वारा दहेज की मांग को पूरा ना कर पाने के कारण महिलाओं को मारने और जलाने तक बात पहुंच जाती है। एक लड़की को हमेशा परिवार या माता – पिता पर बोझ के रूप में देखा जाता है। यह दहेज प्रथा ही है जिसने कन्या भ्रूण हत्या को जन्म दिया है।

दहेज प्रथा के खिलाफ कानून

दहेज प्रणाली भारतीय समाज में सबसे जघन्य सामाजिक प्रथाओं में से एक है। इसने कई तरह के मुद्दों जैसे कन्या भ्रूण हत्या, लड़की को लावारिस छोड़ना, लड़की के परिवार में वित्तीय समस्याएं, पैसे कमाने के लिए अनुचित साधनों का उपयोग करना, बहू का भावनात्मक और शारीरिक शोषण इत्यादि को जन्म दिया है। इस समस्या को रोकने के लिए सरकार ने दहेज को दंडनीय मानते हुए कुछ कानून बनाए हैं।

दहेज निषेध अधिनियम, 1961

दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के तहत दहेज लेने या देने की स्थिति में जुर्माना लगाया जा सकता है। इस अधिनियम के तहत कम से कम 5 वर्ष का कारावास और 15,000 रुपये का न्यूनतम जुर्माना या दहेज की राशि जुर्माने के रूप में वसूल की जा सकती है। दहेज की मांग करना दंडनीय अपराध है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी तरीके से दहेज की मांग करने पर भी 6 महीने का कारावास और 10,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है।

घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 से महिला का संरक्षण

ससुराल वालों द्वारा बहुत – सी महिलाओं के साथ दहेज की मांग को पूरा करने के लिए भावनात्मक और शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार किया जाता है। इस तरह के दुरुपयोग के खिलाफ तथा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए यह कानून लागू किया गया है। यह अधिनियम महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाता है। महिलाओं के साथ शारीरिक, भावनात्मक, मौखिक, आर्थिक और यौन सम्बंधित सभी प्रकार के दुरुपयोग इस कानून के तहत दंडनीय हैं।

दहेज प्रथा को रोकने के उपाय

सरकार के द्वारा भी दहेज प्रथा को रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन हम सभी को मिलकर दहेज प्रथा को रोकने के लिए संकल्प लेना होगा। दहेज प्रथा को रोकने के लिए देश के हर नागरिक को संकल्प लेना होगा कि ना तो दहेज देना है और ना ही लेना है। देश के प्रत्येक नागरिक को जागरूक होना पड़ेगा। तभी इस कुप्रथा को खत्म किया जा सकता है।


दहेज प्रथा को रोकने के लिए हमें महिला शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। महिलाएं जितनी अधिक शिक्षित होंगी उतनी ही वे अपराधों के खिलाफ लड़ने में सक्षम होंगी। इसके साथ ही हमें लड़का-लड़की में भेदभाव को बंद करके देश मे लैंगिक समानता लानी होगी। क्योकि जब तक हम लड़का और लड़की में भेदभाव करते रहेंगे तब तक दहेज प्रथा अन्य प्रथाओं को भी बढ़ावा मिलता रहेगा।

निष्कर्ष

दहेज प्रथा एक बहुत बड़ी सामाजिक बीमारी है। सरकार ने दहेज को एक दंडनीय अपराध मानते हुए कानून पारित किया है लेकिन देश के ज्यादातर हिस्सों में अभी भी इसका पालन नहीं हो रहा जिससे लड़कियों और उनके माता – पिता का जीना मुश्किल हो रहा है। हम सबको मिलकर इस कुप्रथा को खत्म करने के प्रयास करने होंगे।

Dahej pratha par 10 line

  1. भारत में यह प्रथा कई सदियों से चली आ रही है।
  2. रामायण और महाभारत में भी बेटियो को दहेज देने का उदाहरण मिलता है। लेकिन उस समय दहेज प्रथा का स्वरूप वर्तमान दहेज प्रथा से बहुत अलग था।
  3. दहेज लेना और देना दोनों कानून के तहत अपराध है। लेकिन भारत मे आज भी यह प्रथा खुलेआम चल रही है।
  4. Dahej pratha ने हमारी कई बेटियों का जीवन बर्बाद कर दिया, लेकिन फिर भी यह प्रथा कैसे देश की जड़ तक पहुंच गई।
  5. भारत के सभी लोगो को समझना चाहिए कि दहेज सिर्फ एक प्रेम का उपहार है जबरदस्ती दहेज लेना दहेज नहीं किसी की मजबुरी का फायदा उठाना कहलाता है।
  6. दहेज प्रथा के अपराधो को रोकने के लिए भारत सरकार ने दहेज प्रतिबंध अधिनियम 1961 का कानून बनाया है।
  7. भारत के कई समाजों में दहेज प्रथा की निंदा भी की जाती है लेकिन आज भी एक बड़ा वर्ग बिना दहेज के महिलाओं को नही अपनाता।
  8. Dahej pratha को रोकने के लिए हमें महिला शिक्षा को बढ़ावा देना होगा।
  9. हम सबको मिलकर इस कुप्रथा को खत्म करने के प्रयास करने होंगे।
  10. आज के आधुनिक युग में Dahej pratha एक सामाजिक अभिशाप बन चुका है।

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उम्मीद करता हूं दोस्तों की “दहेज प्रथा पर निबंध ( dahej pratha essay in hindi )” से सम्बंधित हमारी यह पोस्ट आपको काफी पसंद आई होगी। इस पोस्ट में हमनें दहेज से सम्बंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियां देने का प्रयास किया है। आशा है आपको पूर्ण जानकारी मिल पाई होगी।

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FAQ About Dahej Pratha In Hindi

प्रश्न.1. दहेज प्रथा की शुरुआत कब हुई?

उत्तर: भारत के सबसे पौराणिक ग्रन्थों जैसे रामायण और महाभारत में भी बेटियो को दहेज देने का उदाहरण मिलता है। इसके अलावा उत्तरवैदिक काल में भी दहेज प्रथा के कुछ उदाहरण मिलते है। लेकिन उस समय Dahej pratha का स्वरूप आज की दहेज प्रथा से बिल्कुल अलग था।

प्रश्न.2. दहेज प्रथा पर नियंत्रण क्यों आवश्यक है?

उत्तर: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में दहेज के लिए 7621 महिलाओ कि हत्या हुई थी। और वर्तमान में ऐसी घटनाएं बहुत तेजी से बढ़ रही है। आज दहेज प्रथा अभिशाप बन चुकी है। इसलिए Dahej pratha पर नियंत्रण आवश्यक है।

प्रश्न.3. दहेज प्रथा एक अभिशाप कैसे है?

उतर: माता-पिता को अपनी बेटी की शादी के समय दहेज में धन और अन्य कीमती उपहार देने पड़ते है। अगर दहेज में धन और तोहफे नहीं दिये जाते तो ससुराल में लड़कियो से गलत व्यवहार किया जाता है या उनके साथ मारपीट की जाती है। इस तरह आज के युग में Dahej pratha एक अभिशाप बन चुका है।

प्रश्न.4. दहेज प्रथा से समाज को क्या – क्या हानि होती है?

उत्तर: आज माता – पिता में विवाह एवं दहेज की चिंता के कारण कई बीमारियां पैदा हो जाती है क्योंकि वो दिन – रात मेहनत करके धन इकट्ठा करने में लगे रहते है ताकि बेटी की शादी करवा सके। कम दहेज देने पर लड़की को ससुराल में अनेक प्रकार के कष्ट दिए जाते हैं। दोनों परिवारों में तनाव और संघर्ष पैदा होता है। दहेज जुटाने के लिए व्यक्ति कई अपराधों की ओर उन्मुख होता है रिश्वतखोरी, चोरी, गबन, आत्महत्या, भ्रष्टाचार आदि। दहेज प्रथा की बहुत सारी हानियां है।

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